Friday, August 31, 2018

मैं ज़्यादा नहीं सोचता: अक्षय कुमार

बीबीसी एक मुलाक़ात में ख़ास बातचीत अक्षय कुमार से. हाल ही में अक्षय कुमार नज़र आए फ़िल्म 'गोल्ड' में. रीमा कागती के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'गोल्ड' भारतीय हॉकी के गौरवशाली अतीत की याद दिलाती है.
अच्छी कहानी पर बनी एक ख़राब फ़िल्म ख़त्म होती है. लोग जाने के लिए उठते हैं. तभी 'उन्माद' फ़िल्म के निर्देशक शाहिद कबीर सबके सामने आकर कहते हैं, 'आप लोगों के बस दो मिनट लूंगा.'

मांगे गए दो मिनट से कुछ ज़्यादा मिनट लेकर शाहिद बताते हैं, 'इस फ़िल्म में आपने जिन कलाकारों को देखा, उन्होंने ज़िंदगी में पहली बार एक्टिंग की है. किसी ने कभी कोई कैमरा फ़ेस नहीं किया था. क्राउडफंडिंग से जुटाए क़रीब सवा करोड़ रुपये में बनी ये फ़िल्म छह महीने में पूरी हुई. सेंसर बोर्ड ने 14 कट लगाए. पिछवाड़े को पिछवाड़ा कहने जैसे शब्दों पर आपत्ति जताई. कई शब्दों को म्यूट किया.'

मैं शाहिद से पूछता हूं, 'वो कौन से शब्द थे जिन्हें म्यूट किया गया?' वो कहते हैं, 'ध्यान से उतर गए. छोड़िए न. उस पर नहीं जाते हैं. फ़िल्म रिलीज हो जाए, बस.'
दिल्ली के प्रेस क्लब में स्पेशल स्क्रीनिंग में दिखाई गई फ़िल्म 'उन्माद' मेरे लिए इस 'बस' की बेचारगी से शुरू होती है.

प्रेस क्लब की पहली मंज़िल के हॉल में गिनती के छह लोग बैठे हैं. फ़िल्म शुरू होने में अभी वक्त है. पीछे की तरफ एक कुर्सी पर बैठी महिला के हाथों में अंग्रेज़ी अख़बार है, जिसकी बड़ी सी हैडिंग है- 'आई टू फेस सेक्सिज्म, रेसिज्म.'
डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता!'

ग़ालिब के शेर से शुरू हुई फ़िल्म उन्माद. आपने इससे पहले उन्माद शब्द कब सुना या पढ़ा था? किसी हिंसा से जुड़ी ख़बरों में या फिर नेताओं के एक-दूसरे पर आरोप लगाते बयानों में.
अब खुद से पूछिए कि क्या आपको आसपास उन्माद बढ़ते दिखा है? शायद इसे सोचते हुए आपके ख़्यालों में एक या दो धर्म आ रहे हों. लेकिन क्या उन्माद यही है?
या फिर वो भी है जिसमें आप कहीं अपनी मुहब्बत के साथ बैठे हैं और एक कैमरा या घूरती आंखें कहीं कुछ रिकॉर्ड कर रहे हैं? फिर आती है आवाज़- 'मुझे भी करने दे' या फिर 'वायरल कर दूंगा' जैसी धमकियां और उनके बदले की मनचाही उगाही.
उन्माद ये भी है और वो भी जिसमें अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बैल बेचने जाते कसाई कल्लू को दबोच लिया जाता है. बैल को गाय बता दिया जाता है.
''हमारी पूजनीय गाय माता को लेकर जा रहा है, जानता नहीं ये जुर्म है. मारो इसे. रुको कैमरा निकालो. रिकॉर्ड करो. इसे  पर भेजो. कसाई से अपनी गाय माता को बचाना है तो तलाब किनारे मिलो. बोलो- जय जय सियाराम.''
नारों के जवाब नारे होते हैं. हाथों में छुरियां दबाए टोपियां लगाए भीड़ आती है - ''हम कहते हैं छोड़ दे हमारे कल्लू को. वरना हम चुप नहीं बैठने वाले. नारा-ए-तकदीर...अल्लाह-ओ-अकबर''
इन नारों से परेशान और अपने लैपटॉप में प्रेस रिलीज़ जैसी ख़बर को पूरा कर चुका मेरे साथ बैठा लड़का फ़िल्म के एसी हॉल से बाहर निकल जाता है.
ठीक वैसे ही जैसे हम में से बहुत लोग इन नारों के ख़ौफनाक नतीजों को सोचे बिना एक दिन से दूसरे दिन की ओर निकल जाते हैं.
फिर चाहे वो कांवड़ यात्रा की बात हो या मुहर्रम की. 'धर्म का मामला है न, चुप रहो'...ये कहते हुए हम उस भीड़ का हिस्सा बने जा रहे हैं जो ईश्वर की कसम खाकर कहती है कि वो नास्तिक है.
बीफ़ बैन के बाद कई परिवारों की रोज़ी-रोटी छिनी है. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का कल्लू भी ऐसा ही है. कल्लू की मदद करता है पूजा-पाठ में लीन रहने वाला शंभु जो कहता है- 'मेरे बैल बेचकर जो पैसे मिले उससे अपना घर चला.'
'लेकिन भाई शंभु, तुम्हारे में तो जानवर बेचना अशुभ होता है.'
'कल्लू भाई, आदमी ज़िंदा नहीं रहेगा तो शुभ-अशुभ का क्या करेंगे. आचार डालेंगे!'
मुसलमानों के पैर छूता शंभु का बेटा. पूजा में ढोल बजाता कसाई कल्लू. शब्बु और अंकुर की मुहब्बत या ये कहें कि 'लव जेहाद'.
ऐसे कई सीन हैं जिससे धार्मिक सौहार्द की 'खुशबू' आती है. लेकिन ये सारे सीन फ़िल्म और आज के सच पर ऐसे ढके गए जैसे किसी विदेशी राष्ट्रपति के दौरे से पहले बनारस के बदबूदार नाले सुंदर परदों की दीवारों से ढक दिए जाते हैं.
फ़िल्म 'हासिल' में आशुतोष राणा का एक डायलॉग है, ''जिसे कोई बांध नहीं सकता उसे युवा कहते हैं. यूथ! युवा को उल्टा कर दो तो क्या हो जाता है? वायु! वायु! वायु जो बहती रहती है. अगर हल्की बहे तो बेहतर. और तेज़ हो गयी तो बेहाल कर देती है.''
अब ज़रा सोचिए, भारत का युवा आज क्या कर रहा है? सस्ता इंटरनेट, झंडे, नारे, देशभक्ति और अपनी पसंद की एक राजनीतिक पार्टी. नतीजा सिर्फ बेहाली.
बेरोज़गारी जिनके लिए मुद्दा है, वो कितने हैं? क्या ये लोग उन करोड़ों भारतीयों तक अपना दर्द पहुंचा पा रहे हैं जो हर पांच साल में ये सोचकर वोट डालते हैं कि 'देश को मजबूत इरादों वाला ही चला सकता है, इसलिए हमारा वोट.... भले ही थोड़ा कष्ट हो लेकिन भविष्य के लिए ये कुर्बानी देंगे'?
इस बात से बेख़बर कि ऐसी कुर्बानियों की 'एक्सपायरी डेट' नहीं होती. ऐसा ही फ़िल्म में एक स्थानीय पत्रकार अंकुर होता है जो अपनी एक ख़बर छपने के इंतज़ार में रहता है लेकिन ख़बर नहीं छपती. निराश होकर कहता है, ''पॉजिटिव ख़बरें छापें तो मां मर जाएगी इनकी. टीवी हो या ख़बरें, सबको क्राइम पेट्रोल या सावधान इंडिया चाहिए.''
अंकुर सही कह रहा था या ग़लत... ये आप खुद से पूछकर देखिए. आख़िर ऐसी कौन सी ख़बर थी जो आपने मसालेदार नहीं होने के बावजूद पढ़ी थी?
'उन्माद' में बैल को गाय बनाकर राजनीति करने और विधायक बनने की तमन्ना लिए एक किरदार होता है - शंकर.
ऐसे कितने ही शंकर हमारे आसपास या अलवर जैसी गलियों में गमछा डाले घूम रहे हैं. इनमें से कुछ रक्षक भक्षक बने जा रहे हैं और कुछ गायों के साथ भी धंधा कर रहे हैं. इन गमछे वाले लोगों के कई साथी होते हैं. कहीं भी कोई संदिग्ध या कहें कि 'मौका' दिखे तो फ़ौरन फ़ोन लगा दिया जाता है. फ़ोन की स्क्रीन पर नंबर फ्लैश होता है -'कॉलिंग फ्रॉम जियो नंबर, शंकर योगी.'
फ़िल्म 'उन्माद' आधी से ज़्यादा ख़त्म हो चुकी है. निर्देशक शाहिद ने बताया था कि सेंसर बोर्ड ने नारों को भी हटाया है. हटने के बाद भी ये नारे असंख्य हैं और मन उचटने लगता है.
हॉल का दरवाज़ा खुलता है तो प्रेस क्लब के आंगन में चल रही प्रेस कॉन्फ्रेंस से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की अंग्रेज़ी कानों में पड़ती है. वो फर्राटेदार अंग्रेज़ी में अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा के साथ बैठकर मोदी सरकार पर रफ़ाएल डील में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे. मैं पीछे पलटकर देखता हूं तो फ़िल्म के शुरू में अख़बार पढ़ रही महिला सो चुकी हैं.
हमारे दौर की दिक्कत ये भी है कि जो बात जैसे कही जा रही थी, वो वहां वैसे पहुंच नहीं रही थी. रील लाइफ हो या रीयल.
'उन्माद' की कहानी हिंदी फ़िल्मों की तरह यानी 'हैप्पी एंडिंग' की तरफ़ आगे बढ़ती है. बोले तो 'सत्यमेव जयते'.
फ़िल्म 'उन्माद' सही वक्त और सही कहानी पर बनी फ़िल्म है. फ़िल्म समीक्षकों की शब्दावली की नकल करूं तो सिनेमाटोग्राफी, एडिटिंग, स्क्रीनप्ले, डायलॉग, कैमरावर्क जैसी चीज़ें औसत हैं. लेकिन शाहिद के दावे पर यकीन करें तो ये सारे काम ही नौसिखियों ने किए हैं.
ऐसे में फ़िल्म समीक्षकों से चुराई शब्दावली को थोड़ा साइड किया जा सकता है. वो ऐसे कि जैसे हिंदी पट्टी का कोई आदमी पहली बार अंग्रेज़ी बोले तो सामने बैठे सज्जन कहें- 'पुअर गाइ'.
फ़िल्म ख़त्म होती है. चलते हुए मेरी नज़र हॉल में लगी एक तस्वीर पर गई. ये प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्यों के साथ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तस्वीर है. तस्वीर में लोगों की भीड़ के पीछे राधा-कृष्ण की तस्वीर है और बराबर में एक मंदिर जैसा छोटा सा मॉडल रखा हुआ है.
'लोग धर्म से ज़्यादा जुनून में एक दूसरे को मार रहे हैं' - उन्माद के डायरेक्टर शाहिद कबीर की ये बात याद आ गई.

Friday, August 17, 2018

捡垃圾的喇嘛

已是北京时间的晚上七点多了,甘加草原上的太阳依然懒懒地斜挂着,不忍下山的样子。在斯柔部落村的帐篷外,几只土拨鼠撅着肥肥的大屁股蹲在自己的洞口,并不怕人。

我正看着出神,坐在一旁的桑杰嘉措突然问,“你知道的一句藏语是什么?”

“哦,扎西德勒?”

“嗯!‘扎西德勒’里的第一个音‘扎’其实就意在生态平衡”,桑杰讲说,藏传佛教中,宇宙分为两部分——精华和容器。精华即包括人在内的所有动物,容器是动物以外的万物,两者合一即为宇宙。精华与容器互相支持,都需要呵护,也就是保持生态平衡。这位有着拉卜楞寺然坚巴佛学学位的喇嘛认为环境保护的理念与自己长期关注的传统文化和佛教思想颇有契合,“传统文化的内核,是我在藏地做环保最强大的基础和动力”。

而他保护家乡生态环境的首要任务则非常简单:捡垃圾。

垃圾食品变垃圾

甘加草原位于青藏高原东北部,地处甘肃与青海交界之地,大片丰美的高原草地被陡峭的群山环绕。近几年来,牧场上的不少牲畜无端死亡,被开膛后在胃里找到了食品塑料包装袋。藏族少年万代克告诉我说,城里说的“垃圾食品”在草原变成了真正的垃圾。

过去牧民饮食习惯里的牛羊肉、酥油茶取材自然,废弃之后也都能成为生态循环的一个环节,自然消解。而今随着牧民生活方式的现代化,加工食品被广泛接纳,方便食品的方便包装——塑料包装、饮料瓶等等——使用过后变成了垃圾,随牧民放牧的足迹被带到草原深处,污染草场环境。

据万代克的观察,这些草原深处的塑料制品很多并不是游客带来的,是牧民自己产生的。013年,在瓦尔塔等几个部落村当时已有的捡垃圾志愿者队伍的基础上,桑杰发起成立了甘加环保志愿者协会,每隔半个月左右就对部落村内外来一次清理。

村里人觉得他们傻,家人也不理解,“为什么要做这个,又没有什么报酬”。 面对这样的责难,桑杰团队的志愿者勒合西起初也觉得难受,不过他说:“看看剖开的羊,胃里搅着塑料,就看一眼,你就会懂我们为什么要做了!”

草原垃圾,水源危机

事实上,这是近年来各地的草原面临的共同问题,在黄河源头之一的约古宗列草原也是如此。

仁曾多杰是青海玉树曲麻莱县当地人,也是民间环保组织禾苗协会的创始人之一,他告诉我,有很多全国各地的各种组织来河源地做环保,做社区建设、生态保育等等,但垃圾问题才是最为现实急迫的。

尤其是在每年的赛马会期间,口感刺激的零食饮料是年轻人和孩子们的最爱。一场比试过后,大量铁质、玻璃或塑料饮品容器在草势稀薄的草场散落。这些散落的垃圾不仅会引起牲畜的误食,还会随水漂流,慢慢释放有害物质,污染临近的水源。在偏远分散的草原雪山,没有人收集它们。这意味着这些垃圾将永远留在那里,带来巨大的生态隐患。

多年来致力于见证、记录和曝光黄河沿线的生态环境危机的环保组织“绿家园志愿者”创始人汪永晨连续七年深入黄河源头,她介绍说,近些年垃圾的情况已经有了不少改善,早几年情况更为严重,垃圾堆在河边就被认为是处理了。在西南财经大学自然资源管理与政策专业讲师贡布泽仁看来,藏族文化中的转神山、祭圣湖传统也正面临垃圾的考验。近年来,很多人用塑料制造的宝瓶及布料丢入神湖之中祭拜,然而这些宝瓶逐渐成为危害湖泊生态系统的主要因素之一。人造布料和塑料瓶子的消解年限超过百年,其释放的污染物持续威胁水生态系统中的动植物。

桑杰的甘加志愿者队伍也意识到这个问题,他们在捡垃圾的过程中着重清理靠近水源的地方。随着各地前来甘加朝拜智格尔白石崖圣山、拜谒神奇溶洞的人逐渐增加,牧民志愿者们还沿着转山的路径安放路标、捡拾垃圾,而这些隐藏在草原深处的路线,政府组织的捡拾和处理部门根本触及不到。

垃圾治理难题

如今,逐渐在乡里得到理解牧民志愿者队伍不断壮大,扩展到了甘加草原全部13个部落村,人数也有230人。在桑杰的沟通和争取下,协会还陆续得到了一些公益平台的资金,支持牧民志愿者们装备清理垃圾所需的手套、扫帚、编织口袋等工具,以及运输清理过程中的交通费用。

运输费用始终是最让桑杰头疼的难题,“如果政府可以多投入资金和人力,在定居点设立分类垃圾回收点,更集中的做处理,效果可能更明显些”,桑杰表示。 但对于这些地方政府来说,无论是在资金还是在市政体系的建设上,都无法满足如此巨大的投入。全球环境研究所生态保护专家彭奎认为,这一套“村收集、乡转运、县处理”的一般垃圾处理模式对于内地人口相对集中的地方是经济的,但是对于广大的牧区而言则是天方夜谭,难以持续。

彭奎表示,当地政府不是不想做,是真的没有办法,“连市县一级都没有做到,怎么会有余力和资金去做乡村的”。他介绍说,全球环境研究所的“清洁水源计划”在尝试另一种思路,把教育、分类和减量引入这个系统中。在青海省玉树毛庄乡,他们依据当地的实际情况成立保护队伍,在学校、寺庙和村民中开展垃圾减量分类教育,并从源头开始自下而上划定不同的区域,分派清理垃圾的任务,定期清理,然后统一拉到村级处理站进行分类。经过分类后,能够回收的垃圾就打包,统一存放,集中到一定程度再拉到县城去卖。不能回收再利用的,才分别采用堆肥、焚烧或者填埋的方式处理。这样算起来,最终需要运往填埋场的垃圾量减少了七八成。

换一种思路

说到底,牧区的垃圾分散,使得收集和集中处理成为政府和牧民长期坚持面临的最大挑战。

这一严峻的环境问题同样引起了商业公司的注意。台湾创新公司小智( )研发设计了将庞大垃圾回收处理系统微型化的 环生零耗机,这一移动式的垃圾回收处理站尝试解决交通不便地区的塑料垃圾回收问题。

2017年,他们来到澜沧江源头的杂多县,把那一周收捡的垃圾回收再造成环保建材。其创始人黄谦智告诉我, 的技术并没有多先进,但它就是试图告诉当地游牧民一种可能性,这些影响到他们生态系统的坏东西是有机会被处理的,并且是以看得见的方式。

Monday, August 13, 2018

कौन था वो लड़का जिसने अमरीकी विमान चुराया, कुछ ही देर में हुआ था क्रैश

अमरीका के सिएटल एयरपोर्ट से खाली यात्री विमान लेकर उड़ने और उसे एक द्वीप पर क्रैश करने वाले व्यक्ति की पहचान एयरलाइन वर्कर के रूप में सामने आई है.
अमरीकी मीडिया के मुताबिक़, इस 29 वर्षीय युवक का नाम रिचर्ड रसैल था जो कि एयरलाइन के लिए विमानों को साफ़ करने और उनमें सामान चढ़ाने का काम किया करता था.
बीते शुक्रवार रिचर्ड द्वारा बिना इजाज़त के प्लेन ले उड़ने के बाद एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा था.
एफ़बीआई की सिएटल डिविज़न के प्रमुख अधिकारी जेय टैब ने बताया था, "अभी इस समय हम ये मान रहे हैं कि एयरक्राफ़्ट में केवल वह ही मौजूद था लेकिन हमने अभी तक दुर्घटना स्थल पर जाकर इसकी पुष्टि नहीं की है."
सिएटल एयरपोर्ट से विमान लेकर उड़ने के बाद इस शख़्स ने 90 मिनट तक हवा में कलाबाजियां खाईं और इसके बाद केट्रोन द्वीप पर जाकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
विमान उड़ाने के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से हुई बातचीत में सामने आया है कि वह विमान उड़ाने के अपने करतब को देखकर आश्चर्यचकित था और उसने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से माफ़ी मांगी.
इसके साथ ही उसने एटीसी से बातचीत में कहा कि वह, "एक टूटा हुआ इंसान है." रसैल के परिवार ने अपने बयान में कहा है कि वह एक समर्पित पति, बेटा और बेहतरीन दोस्त था.
एक ऑनलाइन ब्लॉग के मुताबिक़, रसैल वॉशिंगटन का जन्म फ्लोरिडा में हुआ था और सात साल की उम्र में रसैल का परिवार अलास्का जाकर रहने लगा.
रिचर्ड रसैल ने अपने ब्लॉग पर अपनी पत्नी हेना से मिलने की दास्तां बयां की है.
रसैल सोशल साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद प्रबंधकीय पद हासिल करना चाहते थे. यही नहीं, वह सेना में जाकर अपनी सेवाएं भी देना चाहते थे.
अपने ब्लॉग पर रसैल वीडियो एडिटिंग और तस्वीरों के संपादन से जुड़ी ब्लॉग पोस्ट लिखा करते थे..
रसैल के साथ काम करने वाले रिक क्राइस्टेंसन ने द सिएटल टाइम्स को बताया है, "वह एक शांत लड़का था जिसे सभी साथी पसंद करते थे. मैं रिचर्ड के परिवार के लिए बहुत ही बुरा महसूस कर रहा हूं और मुझे आशा है कि वह इस बुरे दौर से गुज़र जाएंगे."
76 सीटों वाले हॉरज़ॉन एयरलाइन के दो इंजन वाला विमान टर्बोप्रॉप बॉमबार्डियर Q400 खड़ा था. इसके बाद ठीक 7 बजकर 32 मिनट पर (स्थानीय समय) विमान 180 डिग्री पर घूम गया.
अधिकारियों के मुताबिक़, रसैल ने सबसे पहले पुशबैक ट्रैक्टर की मदद से प्लेन को 180 डिग्री पर घुमाया ताकि सही जगह से टेक ऑफ किया जा सके.
इसके बाद रसैल ने विमान को पानी के बेहद क़रीब ले जाकर एक बार फिर हवा में उड़ान भर दी.
एटीसी के साथ बातचीत में उसने बताया है कि वह खुद भी अपने इस करतब को देखकर आश्चर्यचकित है.
उत्तर अमरीका के एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (नोरेड) ने बयान जारी किया है कि उसके फ़ाइटर्स ने रसैल के जहाज़ पर गोलीबारी नहीं की.
अधिकारियों का कहना है कि रात 8 बज कर 47 मिनट पर जहाज़ से संपर्क टूट गया था.
रसैल ने कई मैसेज भेजे जैसे जहाज़ उतारने के विकल्प, कभी अपने किए पर माफ़ी, तो कई बहुत ही अजीब संदेश.
एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने रसैल को जहाज़ उड़ाने में मदद देनी चाही तो उसने जवाब दिया, "नहीं, मुझे मदद नहीं चाहिए.. मैंने कई वीडियो गेम्स खेले हैं."
लेकिन उसकी बातों से लगा कि उसे जहाज़ को लेकर बहुत कम जानकारी है क्योंकि उसने कहा कि टेक-ऑफ़ के वक्त उसकी उम्मीद से ज़्यादा तेल इस्तेमाल हुआ. उसने कहा कि कई निर्देश उसको समझ नहीं आ रहे थे.
जब उसे अमरीकी एयर फोर्स बेस पर उतरने को कहा गया तो उसने कहा, "अरे, वो लोग मुझे पीटेंगे अगर वहां उतरा तो..ओह, शायद उनके पास एंटी-एयरक्राफ़्ट है."
जब कंट्रोलर ने बाएं मुड़ने को कहा तो रसैल ने जवाब दिया, "ये शायद उम्रकैद है, है ना? मुझे उम्मीद है कि ये मेरे जैसे लड़के के लिए हो."
इसके अलावा वह कई अजीब बातचीत करता रहा जैसे कि अगर वो सही से लैंडिंग कर लेता है तो क्या अलास्का एयरलाइन उसे नौकरी देगी या नहीं.
कई ऐसे संकेत भी मिले कि रसैल सुरक्षित लैंडिंग की उम्मीद नहीं कर रहा था. जब उसे उतरने को कहा गया तो उसने कहा, "मुझे नहीं पता, मैं नहीं चाहता. बहुत से लोग हैं जो मुझे प्यार करते हैं. मेरी इस हरकत के बारे में सुनकर बहुत निराश होंगे. मैं उन सबसे माफ़ी मांगना चाहता हूं. मैं बस एक टूटा हुआ इंसान हूं, दिमाग के पेच ढीले हैं."
बेन नाम के एक व्यक्ति रनवे पर चल रहे जहाज़ में सवार थे जब ये चोरी का विमान उड़ा.
उन्होंने ट्वीट किया, "ये पागलपन है..एक पायलट पागल हो गया है और टॉवर के निर्देशों के बावजूद खाली जहाज़ लेकर उड़ गया. टॉवर ने सब बंद कर दिया और वे लोग उस पायलट से बात करने की कोशिश कर रहे हैं. क्या!!!"
एक चश्मदीद जॉन वालड्रोन ने सीएनएन को कहा कि उन्होंने एक प्लेन को लूप में घूमते देखा जिसके बाद वो सीधा हो गया. और एक एंगल पर था. जहाज़ को तकरीबन रोक ही दिया था."
लेह मोर्स ने इस प्लेन का वीडियो बनाया, उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि जहाज़ को देख कर उन्हें लग रहा था कि कुछ ठीक नहीं है.