蒙大拿牛肉到波音飞机,中美两国昨天在特朗普的首次对华国事访问期间旋风般签署了大量经贸协议。
一方面,中美两国在朝鲜半岛和贸易问题上的紧张关系还在持续;另一方面,天然气已成为关乎两国共同利益的一个领域。此次中美签署的能源协议金额高达1400亿美元,占美商贸代表团此次签署协议总金额的一半,其中大部分来自于中方购买美方的液化天然气(LNG)。
但是,正当中国参加波恩联合国气候谈判之时,这些交易不禁让人产生疑问:中国如此大力扩展天然气消费,还能够兑现其气候承诺吗?
过去十年,中国的天然气需求翻了两番还多。由于国内易于开采的天然气资源有限,近年来中国一直都在关注储量丰富的美国页岩气。2016年,中国约35%的天然气需求靠进口来满足,主要来源国是卡塔尔和澳大利亚,但美国也逐渐占有一席之在特朗普的北京之行期间,双方至少签署了五个能源协议,其中包括钱尼尔能源公司的首份对华液化天然气出口长期协议;一项促进阿拉斯加天然气生产的计划; 公司对华出口液化天然气的协议;中国开发西弗吉尼亚页岩气的投资协议;以及美在华建设煤制合成气生产设施的协议。
比煤炭更清洁
国际能源署的《世界能源展望2016》指出,预计到2040年,液化天然气贸易量将翻番,主要是受美国对华出口的推动。
保尔森基金会的研究顾问安德斯·霍夫说,天然气“价格太低,液化天然气市场供过于求,但我认为这一情况很快就会改观。如果中国大力推进华北地区的供暖和工业燃料煤改气转型的话,中国的液化天然气进口将会再创新高。”
中国的《能源发展“十三五”规划》号召用天然气和可再生能源替代煤炭。根据该规划, 年天然气在中国一次能源中的比例将从 年的5.9%增长到10%。如果把眼光放得更远,中国的《能源生产和消费革命战略( - ) 》中则提出到2030年要将天然气在中国能源结构中的比重提升到15%。
2015年,煤炭在中国能源消费总量中的比例下降了2个百分点 ,降到62%,丢失的份额被可再生能源和天然气所代替。能源基金会(美国)北京办事处的卫梵斯和邹骥评论说:“美国对华液化天然气出口通过帮助中国加速煤改气的步伐,有助于中国改善空气质量和向低碳未来转型。”
中国国家发改委能源研究所和其他机构2016年的建模研究表明,一直到2050年天然气都将是中国能源转型的一大动力。只要按照当前政策走下去,并且利用高成本效益技术,中国的排放将在2025年达到峰值,之后便会逐渐下降。天然气的需求尽管会在2045年达到峰值,但到2050年仍将在中国的能源体系中发挥强有力的作用。。
Wednesday, September 19, 2018
Thursday, September 13, 2018
英国和挪威成立基金来保护非洲雨林
承诺一起保护世界上第二大热带雨林的英国和挪威已建立一个基金来挽救中非的刚果盆地。
这一拥有两亿多美元资金的基金旨在为非洲各国政府和刚果雨林的居民提供一个可行的可替代伐木和采矿的生计措施。这片森林面积是法国面积的两倍,跨越六个国家:喀麦隆,中非共和国,刚果民主共和国,赤道几内亚, 加蓬和刚果-布拉柴维尔。 该基金将用于支持遏制破坏热带雨林的项目。专家说,该雨林面积以相当于每周消失2万5千个足球场的速度在减少。卫星成像技术将被用来监控该项目的效果。
投资来制止森林砍伐被认为是最直接和最划算的减排方法。温室气体排放是导致全球气候变暖的因素。
据总部设在英国名叫环境调查处( )的环保组织报告,日本市场销售的鲸肉、小鲸肉和海豚肉中所含有毒化学物质大大超过安全建议标准。
这份研究报告于国际捕鲸委员会( )在智利圣地亚哥举行年会之前出炉。 一直要求日本停止捕鲸。名为“毒物政策”的这份研究报告指出,52%的鲸类动物肉样品中所含汞、甲基水银或多氯联苯( )超过日本政府设定的安全极限。这些化学物质对人类健康的影响表现在对肾脏、肝脏和大脑的损害,造成不孕不育,甚至死亡。
出于对汞中毒的恐惧,日本南部地区的政治家们要求在学校午餐时禁止食用海豚肉和领航鲸肉。
的克莱尔•珀利说,“这些海产品使人,特别是使胎儿,处于实际风险中,不应摆在超市的货架上。”
据《卫报》报道,联合国难民署署长说,全球变暖迫使世界各地离开家园的人数创新高。
联合国难民署高级专员
据《路透社》报道说,一联合国粮食问题专家说,农耕方式上的简单变化可使非洲粮食生产在两个季度内增长两到三倍。
联合国粮食及农业组织的 说,食品价格高涨意味着非洲将结束它对进口粮食的依赖。 他说,各国政府应降低化肥价格和引进高产种子品种。他还敦促加大在灌溉上的投资,但不赞成高科技的解决方案,如转基因生物。
在肯尼亚内罗毕举行的粮农组织地区大会期间对《路透社》说,他希望这个长达一周的会议会为非洲的农业部门制定"可实施的决定"。
该部门雇佣了非洲约2/3的劳力。
说,气候变化可突出资源稀缺矛盾而导致冲突,从而使人们流离失所。
说,气候变化在今天造成强迫性迁移的最主要因素之一。由它带来的环境影响可迫使人们离开传统的居住地,同时还会引发极端贫困和冲突 。
他说,气候变化,全球经济放缓和冲突彼此相互影响,这使迁移人群的分类工作越来越困难。
Monday, September 3, 2018
मोटे लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा कितना?
किसी मोटे शख़्स को देखकर ज़्यादातर लोग यही सोचते हैं कि वो खाता ज़्यादा होगा. बीमारी होने के बावजूद मोटापे
को गंभीरता से नहीं लिया जाता है लेकिन ये जानलेवा भी हो सकता है.
'तारक
मेहता का उल्टा चश्मा' नाम के टीवी सीरियल में डॉक्टर हाथी का किरदार
निभाने वाले कवि कुमार आज़ाद को कौन नहीं जानता. उनका वज़न लगभग 200
किलोग्राम था. 9 जुलाई को उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट के चलते हो गई. तो क्या कार्डियक अरेस्ट का मोटापे से कोई लेना-देना है?
दरअसल, मोटापा अपने आप में तो एक बीमारी है ही लेकिन ये कई दूसरी बीमारियों का कारण भी है और कार्डियक अरेस्ट उनमें से एक है.
मोटापा आज के दौर की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है. ओबेसिटी फाउंडेशन इंडिया
दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉक्टर विवेका कुमार के अनुसार मोटापा, सडन कार्डियक अरेस्ट की एक वजह हो सकता है.
"मोटापे के चलते कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है जो सडन कार्डियक अरेस्ट की वजह बनता है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है ख़तरा बढ़ता जाता है."
लेकिन इसका उपाय क्या है?
डॉक्टर विवेका कुमार का मानना है कि कि इलाज से कहीं बेहतर है कि शुरू से ही सावधानी बरती जाए. "जैसे ही वज़न 4 या 5 किलो बढ़े, खुद को लेकर सतर्क हो जाएं क्योंकि अगर एक बार मोटापा बढ़ गया तो उसे कम करना बहुत मुश्किल हो जाता है. इसलिए शुरू से ही ध्यान दें."
रोज़ व्यायाम करके शरीर का एक्स्ट्रा फ़ैट बर्न किया जा सकता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित रहता है. लेकिन मोटापे की समस्या बड़ी है तो डॉक्टर की सलाह से मेडिकल ट्रीटमेंट सही रहेगा. वैसे जिन लोगों को आनुवांशिक मोटापा होता है उन्हें भी इसकी सलाह दी जाती है.
के मुताबिक़, भारत में क़रीब तीन करोड़ लोग मोटापे की परेशानी से जूझ रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक़, आने वाले पांच सालों में ये आंकड़ा दोगुना हो जाएगा.
अमरीका की बात करें तो हर चार में से एक अमरीकी मोटापे से पीड़ित है. वरवेट होना भी कई तरह का होता है. इसे बॉडी मास इंडेक्स के आधार पर तय किया जाता है. अगर किसी शख़्स का बॉडी मास इंडेक्स 25 से 29.9 है तो डॉक्टरी ज़ुबान में उन्हें ओवरवेट माना जाएगा. वहीं अगर किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स 30 है तो उन्हें मोटापे की श्रेणी में रखा जाएगा. जैसे-जैसे बॉडी मास इंडेक्स बढ़ता जाता है मोटापे की श्रेणी भी बढ़ती जाती है.
लेकिन अगर कोई ये सोचकर निश्चिंत है कि उसे मोटापा नहीं है और सिर्फ़ उसका वज़न अधिक है तो ये ग़लत है. ओवरवेट होते ही स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां शुरू हो जाती हैं. ओवरवेट लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियां, स्ट्रोक, डायबिटीज़, कैंसर, यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से जोड़ों के दर्द की परेशानी, गॉल-ब्लेडर से जुड़ी परेशानी हो सकती है. ऐसे लोगों को नींद से जुड़ी तकलीफ़ भी हो जाती है.
बॉडी मास इंडेक्स का मक़सद यह बताना है कि कोई व्यक्ति मोटा है, पतला है या सामान्य श्रेणी में आता है. इसकी मदद से पता चलता है कि सही वज़न क्या होना चाहिए. व्यक्ति का वज़न पता कर उनकी लंबाई से भाग दे कर बॉडी मास इंडेक्स (
मोटापे का ये सबसे जाना पहचाना प्रकार है. लाइफ़स्टाइल के चलते अक्सर इस वजह से मोटापे की आशंका बढ़ जाती है. ये मोटापे का सबसे सामान्य कारण है वहीं इससे निजात पाना भी सबसे आसान है. डाइट कंट्रोल करके इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.
) का आसानी से पता लगाया जा सकता है. यहां ज़रूरी है कि शख्स़ की लंबाई मीटर स्क्वायर में हो.
शोधकर्ताओं ने अभी तक छह प्रकार के मोटापे की पहचान की है.
1. आनुवांशिक मोटापा
आपने देखा होगा कि कुछ परिवारों में लगभग सभी लोग मोटे होते हैं. इसकी दो वजहें हो सकती हैं. हो सकता है कि परिवार में खाने-पीने की आदत की वजह से वो मोटे हों या फिर उनका मोटापा आनुवांशिक (जेनेटिक) हो. आनुवांशिक मोटापे से निजात पाना काफ़ी मुश्किल होता है लेकिन डाइट कंट्रोल करके इससे छुटकारा पाया जा सकता है.
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अपनी भूख और संतुष्टि के बारे में समझ ही नहीं आता. अभी खाना खाए और अभी भूख लग गई. ऐसे लोगों को हर समय खाने की इच्छा होती है और यही मोटापे की वजह बनती है.
4. नर्वस ओबेसिटी
खाना खाने से वैसे तो दिमागी संतुष्टि मिलती है. लेकिन जिन लोगों को मनोवैज्ञानिक दिक्क़त होती है या फिर अवसाद से ग्रसित होते हैं वो खाने के दौरान अपनी ही चिंताओं में लीन रहते हैं. ऐसे में अकसर भूख से ज़्यादा खाना खाते हैं, जिसकी वजह से मोटापे के शिकार हो जाते हैं.
हॉर्मोन्स के असंतुलन के चलते भी मोटापा होता है और ये मोटापे का एक प्रकार है.
6.थर्मोजेनिक ओबेसिटी
जितना हम खाते हैं, अगर वो एनर्जी शरीर से बाहर नहीं निकले तो चर्बी के रूप में जमती चली जाती है. ये मोटापे का कारण बनता है.
मोटापा क्यों ख़तरनाक है?
डायटिशियन और वेलनेस एक्सपर्ट डॉक्टर शालिनी मानती हैं कि ओबिसिटी और मोटापा आज के समय की एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है और इसका सीधा संबंध हमारे लाइफ़स्टाइल से है.
वो कहती हैं, "इसमें कोई शक़ नहीं है कि दिल से जुड़ी बीमारियों जैसे कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के पीछे मोटापा एक वजह है. मोटापा बढ़ने के साथ ही बीपी बढ़ने लगता है, मधुमेह हो जाता है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है और इन सबका संयुक्त असर कार्डियक अरेस्ट के रूप में नज़र आता है."
डॉ. शालिनी मानती हैं कि भारतीयों के मौजूदा डाइट में फ़ैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ती जा रही है और प्रोटीन की मात्रा घट रही है, जिसका सीधा असर दिल पर पड़ता है. इसके अलावा शारीरिक व्यायाम कम हो गया है, ऐसे में ख़तरा तो है ही.
ओबिसिटी फाउंडेशन की एक स्टडी के मुताबिक़, 30 से ज़्यादा बीमारियां, मोटापे से जुड़ी हुई हैं, जिनमें गठिया, अनिद्रा, कैंसर और दिल से जुड़ी बीमारियां शामिल हैं.
इन लोगों में आकस्मिक मौत का ख़तरा बढ़ जाता है.
डॉ. शालिनी मानती हैं कि आजकल की ज़्यादातर बीमारियों के लिए मोटापा ही ज़िम्मेदार है और मोटापे के लिए लाइफ़स्टाइल.
अमरीकन कॉलेज ऑफ़ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, जो लोग मोटापे का शिकार होते हैं या मोटापे से पीड़ित होते हैं उनमें सडन कार्डियक अरेस्ट की आशंका बढ़ जाती है.
ऐसे में सवाल ये उठता है कि मोटापा, दिल को कैसे नुकसान पहुंचाता है और कार्डियक अरेस्ट की वजह बनता है. पर सबसे ज़रूरी ये समझना है कि कार्डियक अरेस्ट है क्या?
सडन कार्डियक अरेस्ट और दिल के दौरे में फ़र्क होता है. दिल का दौरा तब आता है जब दिल को पहुंचने वाले ख़ून में किसी वजह से रुकावट आ जाए. वहीं कार्डिएक अरेस्ट में किसी गड़बड़ी की वजह से दिल अचानक काम करना बंद कर देता है.
इस स्थिति में व्यक्ति बेहोश हो जाता है, सांस चलनी बंद हो जाती है और अगर तुरंत मदद न मिले तो जान भी जा सकती है.
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